इश्क़ मेरी आदत बन गया
💞 Title: इश्क़ मेरी आदत बन गया
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| इश्क़ मेरी आदत बन गया |
पहले-पहल जब तेरा नाम सुना था,
बस एक हल्की-सी लहर उठी थी दिल में,
जैसे किसी शांत झील पर
हवा ने उँगली रख दी हो।
तब कहाँ पता था मुझे
कि यही लहर एक दिन समंदर बन जाएगी,
और मैं…
मैं तेरी मोहब्बत के पानी में
साँस लेना भी सीख जाऊँगा।
अब हाल ये है कि—
सुबह मेरी तेरे ख्याल से खुलती है,
और रात तेरी याद की चादर ओढ़कर सोती है।
बीच का हर लम्हा
तेरे नाम की माला जपता रहता है।
इश्क़…
अब कोई एहसास नहीं रहा,
ये तो मेरी आदत बन गया है।
जैसे चाय को चीनी की आदत होती है,
जैसे चाँद को रात की,
वैसे ही मुझे
तेरी मुस्कान की आदत हो गई है।
कभी सोचता हूँ —
क्या सच में इतना जरूरी हो गया है तू?
फिर दिल धीरे से हँसता है
और कहता है,
“जरूरी नहीं…
तू तो अब ज़रूरत से भी आगे निकल चुका है।”
तेरे बिना दिन गुजर तो जाता है,
पर पूरा नहीं होता।
काम सारे हो जाते हैं,
पर दिल कहीं और ही अटका रहता है।
भीड़ में खड़ा होता हूँ,
पर तन्हाई साथ चलती है,
क्योंकि उस तन्हाई के हाथ में
तेरी यादों का हाथ होता है।
तू जानती भी है या नहीं —
तेरी आवाज़ अब
मेरे दिन का पहला सुर बन चुकी है।
अगर एक दिन ना सुनूँ,
तो जैसे पूरी धुन बेसुरी लगती है।
ये जो आदत है ना तेरी,
ये धीरे-धीरे लगी थी…
बिल्कुल वैसे ही
जैसे बारिश की पहली बूँद
चुपके से मिट्टी में उतरती है।
पहले तेरी बातें अच्छी लगीं,
फिर तेरी हँसी,
फिर तेरी खामोशी भी
मुझे अपनी लगने लगी।
और अब…
अब तो हालत ये है कि—
तेरा गुस्सा भी
मेरे लिए सुकून लेकर आता है।
लोग कहते हैं
आदतें बुरी होती हैं,
छोड़ देनी चाहिए वक्त रहते।
पर उन्हें कौन समझाए,
ये जो तेरी आदत है ना—
इससे छुटकारा नहीं,
बस इबादत की जाती है।
मैंने कोशिश भी की थी कभी,
खुद को तुझसे थोड़ा दूर रखने की,
पर हर कोशिश
तेरे ही दरवाज़े पर जाकर खत्म हो गई।
जैसे रास्ते थककर
मंज़िल के कदम चूम लेते हैं,
वैसे ही मेरी जिद
तेरी मोहब्बत के आगे झुक गई।
अब तो ये आलम है कि—
कभी-कभी खुद से भी छुपकर
मैं तेरा नाम लिखता हूँ,
हवा पर,
कागज़ पर,
अपनी हथेली की लकीरों पर।
तू मिले ना मिले,
पर तेरा होना
मेरे होने की वजह बन गया है।
मेरी हर धड़कन
अब तेरी टाइमिंग पर चलती है,
तू खुश हो तो तेज़,
तू दूर हो तो धीमी।
इश्क़ सच में अजीब चीज़ है…
पहले दिल में रहता है,
फिर आदत बन जाता है,
और आख़िर में—
इंसान उसी में रहने लगता है।
मैं अब उसी मोड़ पर खड़ा हूँ,
जहाँ तेरे बिना
कोई रास्ता दिखता ही नहीं।
ये मत समझना
कि मैं मजबूर हूँ तुझसे,
नहीं…
मैं तो बस
खुशी-खुशी तेरी गिरफ्त में हूँ।
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| इश्क़ मेरी आदत बन गया |
क्योंकि तेरी मोहब्बत
कोई कैद नहीं,
एक मीठी-सी आज़ादी है—
जहाँ मैं खुद को
सबसे ज़्यादा अपना महसूस करता हूँ।
अगर कभी तू पूछे मुझसे—
“इतना क्यों चाहते हो मुझे?”
तो शायद मैं जवाब ना दे पाऊँ,
क्योंकि कुछ इश्क़
समझाए नहीं जाते,
बस जीए जाते हैं।
और मैंने…
मैंने तो तुझे
जीने की आदत बना लिया है।
अब दुआ बस इतनी है—
जब तक ये साँसें चलें,
तेरा नाम इनके साथ चलता रहे,
और अगर कभी रुक भी जाएँ ये साँसें…
तो आख़िरी लफ़्ज़ भी
तेरा ही निकले।
क्योंकि सच यही है —
इश्क़ अब मेरा शौक नहीं रहा,
मेरी आदत बन गया है…
और तू—
मेरी सबसे खूबसूरत लत। 💞


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